शनिवार, 13 सितंबर 2008

जय सिंगूर



सिंगूर पर एक कविता प्रेषित कर रहा हूँ, आशा है पसंद आएगी।


जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर

टाटा के खट्टे अंगूर
ममता बनी उत्पाती लंगूर
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

इनकी खींचातानी से
बुद्धू के गाल हुए
जैसे लाल चटक सिन्दूर
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

सपा,भाकपा,ममता,मेधा
के गठजोड़ ने किया मजबूर
टाटा के नैनो का सपना
सिंगूर से हो गया अति दूर
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

नैनो के बहार जाने से
लाखों रोजगार बंगाल से फुर्र
करोड़ों के अड़तीस सेज भी
बंगाल छोड़ने को मजबूर
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

अचुतानंद,बिशनोई,राणे को
भी भूमि अधिग्रहण नही मंजूर
डीएलएफ,सत्यम,इन्फोसिस भी
बंगाल छोडेंगे हुजूर
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

एट्टीननाइंटीफोर क़ानून ने
विकास पथ में बिखराए शूल
आर एंड आर की नीति नही
तो कैसे खिलेंगे विकास के फूल
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....

बाद में बंगाली भी सोंचेंगे
ममता ने की भरी भूल
जय सिंगूर,जय-जय सिंगूर....


चित्र :- साभार गूगल

2 टिप्‍पणियां:

ramlal ने कहा…

subah ki bayar main mza aa gaya

ramlal ने कहा…

behad khoobsurat hai ye najm janab kya kahein kahne ko kya rah gaya hai. sari katha to apne pad me kah dee